उल्फ़त का जब नतीजा हो गया
अब हुस्न-ओ- दोनों का ऐतबार हो गया
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दिल्ली के ग़ज़ल शायर, अपनी अंतरंग और रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध।
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फ़ज़ा ख़ंदा-ए गुल तंग व ज़ौक़ ऐश बे पर्वा
फ़राग़त गाह आग़ोश वदा दिल पसंद आया
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो