उस को ज़रा नहीं होता
राहत-फ़िज़ा नहीं होता
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दिल्ली के ग़ज़ल शायर, अपनी अंतरंग और रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध।
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ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
उन्हीं दिल्ली की शामों के समकालीन।
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता
उन्हीं दिल्ली की शामों के समकालीन।