इन्ही रवाँ द्वां लहरों पे ज़िंदगी कट जाए
हो तेरा साथ मयस्सर तो पार अतरना क्या
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
जदीद ग़ज़ल के बेचैन प्रयोगधर्मी, छह दशकों से उसकी ज़बान और क़वाइद को नए साँचों में ढालते हुए।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.