रोबरो होवे जो चशमान बुताँ से ऐ दिल
डरते रहना ही मुनासिब है सियह मसतों से
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
आगरा के जनकवि, जिन्होंने मेले, त्योहार और आम ज़िंदगी को उर्दू नज़्म में उतारा।
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