आ शैख़ गफ़तग्वे परेशाँ पे तो न जा
मस्ती में अब तो क़िबला-ए हाजात हो गई
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अठारहवीं सदी के अग्रणी उर्दू शायर, जिन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" कहा जाता है।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.