आ बीठता था सूफ़ी हर सुब्ह मीकदे में
शुक्र ख़ुदा कि निकला वाँ से ख़राब हो कर
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अठारहवीं सदी के अग्रणी उर्दू शायर, जिन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" कहा जाता है।
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