आ एक दो दम आपस में रखें सोहबत
कढ़ने को हूँ में आँधी रोने को है तो
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अठारहवीं सदी के अग्रणी उर्दू शायर, जिन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" कहा जाता है।
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आतिश कदा है सीना मिरा राज़ निहाँ से
ऐ वाए अगर मरज़ इज़हार में आवे
एक ही तड़प के गिर्द दो उस्ताद।