गरचे है इफ़शा राज़ अहल नज़र की फ़ुग़ाँ
हो नहीं सकता कभी शेवा-ए रिंदाना आम
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.