मुझे आह व फ़ुग़ान नीम शब का फिर पयाम आया
थम ऐ रह रो कि शायद फिर कोई मुश्किल मक़ाम आया
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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