उमीद-ए-सहर ले के चला हूँ शब-ए-ग़म में
मंज़िल तो नहीं है मगर एक राह तो निकली
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू के कश्मीरी-हिन्दू उस्ताद, जिनकी देशभक्ति की नज़्मों ने एक पीढ़ी को जगाया।
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