फ़ितरत की एक शय है जिसे हम कहें हैं दिल
मौज-ए-नसीम-ए-सुबह है या दर्द का असर
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू के कश्मीरी-हिन्दू उस्ताद, जिनकी देशभक्ति की नज़्मों ने एक पीढ़ी को जगाया।
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