है मशहूर कि हसरत को है शब का आराम
शौक़ वो है कि सहर तक नहीं सोने देता
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
"इंक़लाब ज़िंदाबाद" के रचयिता, जिन्होंने स्वतंत्रता-सेनानी की आग को कोमलतम ग़ज़ल से जोड़ा।
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