तबीयत इन दिनों बेगाना-ए- होती जाती है
मेरे हिस्से की हर ख़ुशी कम होती जाती है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
रूमानी ग़ज़ल के उस्ताद, जिनकी मुशायरों की अदायगी ने उन्हें जीवनकाल में ही दंतकथा बना दिया।
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