उमीद-ए-वस्ल ने दम-भर न चैन लेने दिया
गया वो वक़्त कि रोता था हिज्र-ए-यार में मैं
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
लखनऊ शैली के सह-संस्थापक, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल की भाषा को परिष्कृत और मँजवाया।
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