ज़िंदगी अपनी इसी शौक़ में गुज़री नासिख़
आज वो आए कि कल आए कि परसों आए
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
लखनऊ शैली के सह-संस्थापक, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल की भाषा को परिष्कृत और मँजवाया।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.