न पूछ आलम-ए-बर्बादी-ए-जहान-ए-दिल
हर एक घर में है इस शहर के ख़राबी-ए-दिल
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
लखनऊ शैली के सह-संस्थापक, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल की भाषा को परिष्कृत और मँजवाया।
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