याँ आदमी पे जान को वारे है आदमी
और आदमी ही तेग़ से मारे है आदमी
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
आगरा के जनकवि, जिन्होंने मेले, त्योहार और आम ज़िंदगी को उर्दू नज़्म में उतारा।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.