काहे को ब्याही बिदेस रे, लखी बाबुल मोरे
हम तो बाबुल तोरे बाग़ की चिड़िया, चुगे का आई परदेस रे
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू/हिन्दवी कविता के जनक — तेरहवीं सदी के बहुश्रुत कवि जिन्होंने फ़ारसी और दिल्ली की बोली को गीत में पिरोया।
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