नहीं है आज जो क़द्र-ए-सुख़न तो कुछ नहीं
सुना है आते हैं दिन याद-ए-रफ़्ता-गाँ के
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
लखनऊ दरबार के बहुमुखी शायर और भाषाविद, अपनी हाज़िरजवाबी और शब्द-क्रीड़ा के लिए प्रसिद्ध।
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