राह-ए-मज़मून-ए-ताज़ा बंद नहीं
ता क़यामत खुला है बाब-ए-सुख़न
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
"उर्दू शायरी के पिता", जिनके दकनी दीवान ने ग़ज़ल को इस भाषा में स्थापित किया।
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