सजन टुक नाज़ सूँ मुझ पास आ आहिस्ता आहिस्ता
छुपी बातें अपस की सुना आहिस्ता आहिस्ता
ग़रज़ गोयाँ की बाताँ कूँ न ला ख़ातिर मनीं हरगिज़
सजन इस बात कूँ ख़ातिर में ला आहिस्ता आहिस्ता
हर इक की बात सुनने पर तवज्जोह मत कर ऐ ज़ालिम
रक़ीबाँ उस सीं होवेंगे जुदा आहिस्ता आहिस्ता
मबादा मोहतसिब बदमस्त सुन कर तान में आवे
तम्बूरा आह का ऐ बजा आहिस्ता आहिस्ता
'वली' हरगिज़ अपस के दिल कूँ सीने में न रख ग़म-गीं
कि बर लावेगा मतलब कूँ ख़ुदा आहिस्ता आहिस्ता
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मुफ़लिसी सब बहार खोती है
मर्द का ऐतबार खोती है
देखना हर सुबह तुझ रुख़्सार का
है मुताला मुझ दिल-ए-बीमार का