सब पे तू मेहरबान है प्यारे
कुछ हमारा भी ध्यान है प्यारे
आ कि तुझ बिन बहुत दिनों से ये
एक सूना मकान है प्यारे
तू जहाँ नाज़ से क़दम रख दे
वो ज़मीन आसमान है प्यारे
मुख़्तसर है ये शौक़ की रूदाद
हर नफ़स दास्तान है प्यारे
अपने जी में ज़रा तो कर इंसाफ़
कब से ना-मेहरबान है प्यारे
टूटे हुए दिलों का न ले
तू यूँही धान पान है प्यारे
हम से जो हो सका सो कर गुज़रे
अब तिरा इम्तिहान है प्यारे
मुझ में तुझ में तो कोई फ़र्क़ नहीं
इश्क़ क्यूँ दरमियान है प्यारे
क्या कहे हाल-ए-दिल ग़रीब 'जिगर'
टूटी फूटी ज़बान है प्यारे
Responses
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
तबीयत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है
मेरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है