आया न रास नाला-ए- का असर मुझे
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे
ले के मुझ से देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे
हर-सू दिखाई देते हैं वो जल्वा-गर मुझे
क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे
मिलती नहीं है लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-जिगर मुझे
भूली हुई न हो निगह-ए-फ़ित्नागर मुझे
डाला है बे-ख़ुदी ने अजब राह पर मुझे
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे
करना है आज हज़रत-ए-नासेह से सामना
मिल जाए दो घड़ी को तुम्हारी नज़र मुझे
मस्ताना कर रहा हूँ रह-ए-आशिक़ी को तय
ले जाए जज़्ब-ए-शौक़ मिरा अब जिधर मुझे
डरता हूँ जल्वा-ए-रुख़-ए-जानाँ को देख कर
अपना बना न ले कहीं मेरी नज़र मुझे
यकसाँ है हुस्न-ओ-इश्क़ की सर-मस्तियों का रंग
उन की ख़बर उन्हें है न मेरी ख़बर मुझे
मरना है उन के पाँव पे रख कर सर-ए-नियाज़
करना है आज क़िस्सा-ए-ग़म मुख़्तसर मुझे
सीने से दिल अज़ीज़ है दिल से हो तुम अज़ीज़
सब से मगर अज़ीज़ है तेरी नज़र मुझे
मैं दूर हूँ तो रू-ए-सुख़न मुझ से किस लिए
तुम पास हो तो क्यूँ नहीं आते नज़र मुझे
क्या जानिए क़फ़स में रहे क्या मोआ'मला
अब तक तो हैं अज़ीज़ मिरे बाल-ओ-पर मुझे
Responses
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
तबीयत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है
मेरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है