कोई उम्मीद बर नहीं आती
सितारों से आगे
तेरे इश्क़ की इंतहा
रोज़ दिखलाते हो दामन तर
है और भी
आस रही
नहीं है
होती है
ख़ुदी
लब पे आती है दुआ
इंतज़ार
सुबह-ए-वतन
शहर की सुबह