Contemporary · बरेली
बरेली के वसीम बरेलवी छह दशकों से मुशायरे के मंच पर राज करते हैं — ऐसे शेरों से जो सुनने में सादा लगते हैं और गहरे उतरते हैं: ख़ुद्दारी पर, सलीक़े से हारने पर, छोटी मेहरबानियों की सियासत पर। पेशे से उर्दू के प्रोफ़ेसर, वे हिंदुस्तान में क्लासिकी ग़ज़ल की ज़िंदा रिवायत हैं।
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