Progressive · 1921–1980 · लुधियाना – बम्बई
अब्दुल हई, जो साहिर लुधियानवी के नाम से लिखते थे, बीस-पच्चीस की उम्र में ही "तल्ख़ियाँ" से मशहूर हो गए। बम्बई आकर उन्होंने साबित किया कि फ़िल्मी गीत भी असली शायरी हो सकते हैं — ऐसे गीतों में जो जंग, ग़रीबी और मोहब्बत की क़ीमत पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने शादी नहीं की; उनके कलाम की कसक उनकी शख़्सियत का हिस्सा बन गई।
कोई शाइर नहीं मिला।