Classical · 1690–1744 · दिल्ली – दिल्ली
शाकिर नाजी दिल्ली के उन पहले शायरों की नस्ल से थे जो वली का दीवान उत्तर पहुँचने पर फ़ारसी से रेख़्ता की ओर मुड़े। कुछ तज़्किरों के मुताबिक़ पेशे से सिपाही, उन्होंने सीधी, मुहावरेदार ग़ज़ल लिखी जिसमें अठारहवीं सदी की शुरुआती दिल्ली की बोली महफ़ूज़ है। उनका दीवान ज़बान के बनने के दशकों का अहम दस्तावेज़ है।
कोई शाइर नहीं मिला।