Progressive · 1914–1976 · ग्वालियर – बम्बई
जाँ निसार अख़्तर तरक़्क़ीपसंद तहरीक के मरकज़ी शायरों में थे और उन शोर भरे दशकों में उन्होंने धीमी, घरेलू ग़ज़ल लिखी। उन्होंने "हिंदोस्ताँ हमारा" जैसा युगांतकारी संकलन तैयार किया और बेहद नफ़ीस फ़िल्मी गीत लिखे। लेखिका सफ़िया अख़्तर के शौहर और जावेद अख़्तर के वालिद — वे उर्दू के एक बड़े अदबी ख़ानदान की कड़ी हैं।
कोई शाइर नहीं मिला।