चश्म बीना से है जारी जू ख़ूँ
!लम हाज़िर से है दीं ज़ार व ज़बों
इल्म रा बर तन ज़नी मारे बूद
इल्म रा बर ज़नी यारे बूद
!आए इमाम अआशक़ान दर्दमंद
याद है मुझ को तिरा हर्फ़ बुलंद
ख़ुश्क मग़ज़ व ख़ुश्क तार व ख़ुश्क पोसत
अज़ कुजा मी आईद अईं आवाज़ दोस्त
दूर हाज़िर मस्त चंग व बे सुरूर
बे सबात व बे यक़ीन व बे हुज़ूर
क्या ख़बर उस को कि है ये राज़ क्या
दोस्त क्या है दोस्त की आवाज़ क्या
आह योरप बा फ़रोग़ व ताब नाक
नग़्मा उस को खींचता है सू
बर समा रास्त हर किस चीर नीसत
तमह हर मरग़के अनजीर नीसत
पढ़ लिए में ने अलोम शरक़ व ग़रब
रूह में बाक़ी है अब तक दर्द व कर्ब
दस्त हर ना अहल बीमारत कनद
सू मादर आका तीमारत कनद
ऐ निगह तेरी मिरे दिल की कुशाद
खोल मुझ पर नकतह हुक्म जहाद
नक़्श हक़ रा हम ब अम्र हक़ शिकन
बर ज़जाज दोस्त संग दोस्त ज़न
है निगाह ख़ावरां मसहोर ग़रब
हूर जन्नत से है ख़ोशतर हूर ग़रब
ज़ाहिर नक़रा गर असपीद असत व नौ
!दसत व जामा हम सियह गरदो अज़ो
!आह मकतब का जवान गर्म ख़ूँ
!साहर अफ़रंग का सैद ज़बों
मुर्ग़ पर नारसता चूँ परां शोद
तमह हर गरबह दरां शोद
ता कुजा आवीज़श दीन व वतन
!जोहर जाँ पर मक़दम है बदन
क़ल्ब पहलू मी ज़िंदा बा ज़र बशब
इंतिज़ार रोज़ मी दारद ज़हब
सर आदम से मुझे आगाह कर
!ख़ाक के ज़र्रे को मेहर व माह कर
ज़ाहरश रा पशह आरद बचरख़
बातनश आमद मुहीत हफ़्त चर्ख़
ख़ाक तेरे नूर से रौशन बसर
ग़ाईत आदम ख़बर है या नज़र
आदमी दीद असत बाक़ी पोसत असत
दीद आँ बाशद कि दीद दोस्त असत
ज़िंदा है मशरिक़ तिरी गुफ़्तार से
अमतें मरती हैं किस आज़ार से
हर हलाक उम्मत पीशीं कि बूद
ज़ानका बर जनदल गुमाँ बरदनद अवद
अब मुसलमाँ में नहीं वो रंग व बू
सर्द क्यूँकर हो गया उस का लहू
ता दिल साहबदले नामद ब दर्द
हेच क़ोमे रा ख़ुदा रुस्वा न करद
गरचे बे रौनक़ है बाज़ार वजूद
कौन से सोदे में है मरदों का सूद
ज़ीरकी बफ़रोश व हैरानी बख़र
ज़ीरकी ज़न असत व हैरानी नज़र
हम नफ़स मेरे सलातीं के नदीम
!मीं फ़क़ीर बे कुलाह व बे गलीम
बनदिया यक मर्द रौशन दिल श्वी
ब कि बर फ़र्क़ सर शाहां रवी
ऐ शरीक मस्ती ख़ासान बदर
!मीं नहीं समझा हदीस जब्र व क़दर
बाल बाज़ाँ रा स्वे सुल्ताँ बरद
बाल ज़ाग़ां रा बगोरसतां बरद
कारोबार ख़सर्वी या राहबी
क्या है आख़िर ग़ाईत दीन नबी
मस्लहत दर दीन मा जंग व शिकवा
मस्लहत दर दीन ईसा ग़ार व कोह
किस तरह क़ाबू में आए आब व गुल
किस तरह बेदार हो सीने में दिल
बंदा बाश व बर ज़मीं रो चूँ समंद
चूँ जनाज़ा ने कि बर गर्दन बरनद
सर दीं इदराक में आता नहीं
किस तरह आए क़यामत का यक़ीं
पस क़यामत शो क़यामत रा बबीं
दीदन हर चीज़ रा शर्त असत अईं
आसमाँ में राह करती है ख़ुदी
सैद मेहर व माह करती है ख़ुदी
बे हुज़ूर व बा फ़रोग़ व बे फ़राग़
!आपने नख़चीरों के हाथों दाग़ दाग़
आँ कि अरज़द सैद रा इश्क़ असत व बस
!लीकन अव के गनजद अंदर दाम किस
तुझ पे रौशन है ज़मीर काएनात
किस तरह मोहकम हो मिल्लत की हयात
दाना बाशी मरग़कानत बरचननद
ग़ुंचा बाशी कूद कानत बरकननद
दाना पिन्हाँ किन सरापा दाम शो
ग़ुंचा पिन्हाँ किन गीआह बाम शो
तो ये कहता है कि दिल की कर तलाश
तालिब दिल बाश व दर पैकार बाश
जो मिरा दिल है मिरे सीने में है
मेरा जौहर मेरे आईने में है
तो हमी गोई मिरा दिल नीज़ हसत
दिल फ़राज़ अर्श बाशद ने ब पस्त
तो दिल ख़ुद रा दले पनदाशती
जसतज्वे अहल दिल बगज़ाशती
आसमानों पर मिरा फ़िक्र बुलंद
में ज़मीं पर ख़्वार व ज़ार व दर्दमंद
कार दुनिया में रहा जाता हूँ में
ठोकरें उस राह में खाता हूँ में
क्यूँ मिरे बस का नहीं कार ज़मीं
अबला दुनिया है क्यूँ दानाये दीं
आँ कि बर अफ़्लाक रफ़तारश बूद
बर ज़मीं रफ़तन चा दश्वारश बूद
इल्म व हिकमत का मिले क्यूँकर सुराग़
किस तरह हाथ आए सोज़ व दर्द व दाग़
इल्म व हिकमत ज़ाईद नान हलाल
इश्क़ व रक़त आईद अज़ नान हलाल
है ज़माने का तक़ाज़ा अंजुमन
!आवर बे ख़ल्वत नहीं सोज़ सुख़न
ख़ल्वत अज़ अग़्यार बाईद ने ज़ यार
पोसतीं बहर दे आमद ने बहार
हिन्द में अब नूर है बाक़ी न सोज़
!आहल दिल उस देस में हैं तीरा रोज़
कार मरदां रौशनी व गर्मी असत
कार दोनां हीला व बे शरमी असत
Responses
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जो में सर ब सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा
तिरा दिल तो है सनम आश्ना तुझे क्या मिले गा नमाज़ में
कभी जो आवारा-ए जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसीं गे
बरहना पाई वही रहे गी मगर नया ख़ार ज़ार होगा
सुना दिया गोश मुंतज़िर को हिजाज़ की ख़ामुशी ने आख़िर
जो अहद सहरायीवं से बाँधा गया था फिर उस्तुवार होगा
दयार मग़रिब के रहने वालो ख़ुदा की बस्ती दुकाँ नहीं है
खरा जिसे तुम समझ रहे हो वो अब ज़र कम अय्यार होगा
कहा जो क़ुमरी से में ने इक दिन यहाँ के आज़ाद पा ब गुल हैं
तो ग़ुंचे कहने लगे हमारे चमन का ये राज़दार होगा
न पूछ इक़बाल का ठिकाना अभी वही कैफ़ियत है उस की
कहीं सर रह गुज़ार बैठा सितम कश इंतिज़ार होगा