जब ब तक़रीब यार ने महमिल बाँधा
तपिश शौक़ ने हर ज़र्रा पे इक बाँधा
अहल बीनिश ने ब हैरत कदा-ए शोख़ी नाज़
जौहर आइना को तूती बिस्मिल बाँधा
यास व अमीद ने यक अरबदा मैदाँ माँगा
इज्ज़ हिम्मत ने तिलिस्म दिल साइल बाँधा
न बनधे तिश्नगी ज़ौक़ के मज़मूँ ग़ालिब
गरचे दिल खोल के दरिया को भी साहिल बाँधा
असतलाहात असीरान तग़ाफ़ुल मत पूछ
जो गिरह आप न खोली उसे मुश्किल बाँधा
यार ने तिश्नगी शौक़ के मज़मूँ चाहे
हम ने दिल खोल के दरिया को भी साहिल बाँधा
तपिश आईना पर्वाज़ तमन्ना लाई
नामा-ए शौक़ ब हाल दिल बिस्मिल बाँधा
दीदा ता दिल है यक आईना चराग़ाँ किस ने
ख़ल्वत नाज़ पे पीराईۂ महफ़िल बाँधा
नाआमीदी ने ब तक़रीब मज़ामीन ख़ुमार
कूचा-ए मौज को ख़मीआज़ۂ साहिल बाँधा
मुतरिब दिल ने मिरे तार नफ़स से ग़ालिब
साज़ पर रिश्ता पिये नग़्मा-ए बीदलؔ बाँधा
नात्वानी है तमाशाई उम्र रफ़्ता
रंग ने आईना आँखों के मुक़ाबिल बाँधा
नोक हर ख़ार से था बसका सर दज़दी ज़ख़्म
चूँ नमद हम ने कफ़ पा पे असद दिल बाँधा
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है