हुजूम नाला हैरत आजिज़ अर्ज़ यक अफ़ग़ां है
ख़मोशी रीशۂ सद नीस्ताँ से ख़स ब दंदाँ है
तकल्लुफ़ बर तरफ़ है जाँ सिताँ तर लुत्फ़ बद ख़्वीआं
बे हिजाब नाज़ तेग़ तेज़ उर्यां है
हुई ये कसरत से तलफ़ कैफ़ियत शादी
कि सुब्ह ईद मुझ को बद तर अज़ चाक गरेबाँ है
दिल व दीं नक़्द ला साक़ी से गर सौदा क्या चाहे
कि उस बाज़ार में साग़र मता दस्त गर्दां है
ग़म आग़ोश बला में परवरिश देता है आशिक़ को
चराग़ रौशन अपना क़ुल्ज़ुम सरसर का मरजां है
तकल्लुफ़ साज़ रुस्वाई है ग़ाफ़िल शर्म रानाई
दिल ख़ूँ गश्ता दर दस्त हिना आलूदा उर्यां है
असदؔ जमइय्यत दिल दर कनार बे ख़ुदी ख़ुश तर
दो आलम आगही सामान यक ख़्वाब परेशाँ है
कि जामे को अरक़ सई उरूज नश्शा रंगीं तर
ख़त रुख़्सार साक़ी ता ख़त साग़र चराग़ाँ है
रहा बे क़दर दिल दर पर्दा-ए जोश ज़ुहूर आख़िर
गुल व नर्गिस बहम आईना व अक़लीम कोरां है
तमाशा सरख़ोश ग़फ़लत है बा वस्फ़ हुज़ूर दिल
हुनूज़ आईना ख़ल्वत गाह नाज़ रब्त मिज़्गाँ है
तकल्लुफ़ बर तरफ़ ज़ौक़ ज़ुलेख़ा जम्अ कर वर्ना
परेशाँ ख़्वाब आग़ोश वदा यूसुफ़ सिताँ है
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है