गर तुझ को है यक़ीन अजाबत न माँग
यानी बग़ैर यक बे मुद्दआ न माँग
आता है दाग़ हसरत दिल का शुमार याद
मुझ से मिरे गुनह का हिसाब ऐ ख़ुदा न माँग
ऐ आरज़ू शहीद वफ़ा ख़ूँ बहा न माँग
जुज़ बहर दस्त व बाज़ोये क़ातिल दुआ न माँग
बरहम है बज़्म ग़ुंचा ब यक जुम्बिश नशात
काशाना बसका तंग है ग़ाफ़िल हुआ न माँग
में दूर गर्द अर्ज़ रसोम नियाज़ हूँ
दुश्मन समझ वले निगह-ए आश्ना न माँग
यक बख़्त औज नज़्र सुबुक बारी असदؔ
सर पर वबाल साया-ए बाल हुमा न माँग
गुस्ताख़ी विसाल है मशातۂ नियाज़
यानी दुआ बजज़ ख़म ज़ुल्फ़ दोता न माँग
ईसा तिलिस्म हुस्न तग़ाफ़ुल है ज़ीनहार
जुज़ पुश्त चश्म नुस्ख़ा अर्ज़ दवा न माँग
नज़्ज़ारा-ए दीगर व दिल ख़ूनीं नफ़स दिगर
आईना देख जौहर बर्ग दुआ नमानग
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है