कोह के हूँ बार ख़ातिर गर सदा हो जाइए
बे तकल्लुफ़ ऐ शरार जस्ता क्या हो जाइए
बीज़ा आसा नंग बाल व पर है ये कुंज क़फ़स
अज़ सर नौ हो गर रहा हो जाइए
वुसअत मशरब नियाज़ कुल्फ़त वहशत असदؔ
यक बयाबाँ साया-ए बाल हुमा हो जाइए
रखिए नाज़ हाये इल्तिफ़ात अव्वलीं
आशीआन ताइर रंग हिना होजायीए
लुत्फ़ इश्क़ हरीक अंदाज़ दिगर दखलायीए गा
बे तकल्लुफ़ यक निगाह आश्ना होजायीए
दादाज़ दस्त जफ़ाये सदमा ज़र्ब अलमसल
गर हमा उफ़्तादगी जूँ नक़्श पा होजायीए
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है