ज़माना सख़्त कम-आज़ार है ब-जान-ए-असद
वगर्ना हम तो तवक़्क़ो ज़ियादा रखते हैं
तन-ए-ब-बंद-ए-हवस दर नदादा रखते हैं
-ए-ज़-कार-ए-जहाँ ऊफ़्तादा रखते हैं
तमीज़-ए-ज़िश्ती-ओ-नेकी में लाख बातें हैं
ब-अक्स-ए-आइना यक-फ़र्द-ए-सादा रखते हैं
ब-रंग-ए-साया हमें बंदगी में है तस्लीम
कि दाग़-ए- ब-जाबीन-ए-कुशादा रखते हैं
ब-ज़ाहिदाँ रग-ए-गर्दन है रिश्ता-ए-ज़ुन्नार
सर-ए-ब-पा-ए-बुत-ए-ना-निहादा रखते हैं
मुआफ़-ए-बे-हूदा-गोई हैं नासेहान-ए-अज़ीज़
दिल-ए-ब-दस्त-ए-निगारे नदादा रखते हैं
ब-रंग-ए-सब्ज़ा अज़ीज़ान-ए-बद-ज़बान यक-दस्त
हज़ार तेग़-ए-ब-ज़हर-आब-दादा रखते हैं
अदब ने सौंपी हमें सुर्मा-साइ-ए-हैरत
ज़-बन-ए-बस्ता-ओ-चश्म-ए-कुशादा रखते हैं
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है