सुर्मा-ए-मुफ़्त-ए- हूँ मिरी क़ीमत ये है
कि रहे चश्म-ए-ख़रीदार पे एहसाँ मेरा
रुख़्सत-ए-नाला मुझे दे कि मबादा ज़ालिम
तेरे चेहरे से हो ज़ाहिर -ए-पिन्हाँ मेरा
ख़ल्वत-ए-आबला-ए-पा में है जौलाँ मेरा
ख़ूँ है दिल तंगी-ए-वहशत से बयाबाँ मेरा
हसरत-ए-नश्शा-ए-वहशत न ब-सइ-ए-दिल है
अर्ज़-ए-ख़म्याज़ा-ए-मजनूँ है गरेबाँ मेरा
फ़हम ज़ंजीरी-ए-बे-रब्ती-ए-दिल है या-रब
किस ज़बाँ में है लक़ब ख़्वाब-ए-परेशाँ मेरा
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है