नक़्श-ए-नाज़-ए-बुत-ए-तन्नाज़ ब-आग़ोश-ए-रक़ीब
पा-ए-ताऊस पए-ख़ामा-ए-मानी माँगे
तू वो बद-ख़ू कि तहय्युर को तमाशा जाने
वो अफ़्साना कि आशुफ़्ता-बयानी माँगे
वो तप-ए--ए-तमन्ना है कि फिर सूरत-ए-शम्अ'
शो'ला ता-नब्ज़-ए-जिगर रेशा-दवानी माँगे
तिश्ना-ए-ख़ून-ए-तमाशा जो वो पानी माँगे
आइना रुख़्सत-ए-अंदाज़-ए-रवानी माँगे
रंग ने गुल से दम-ए-अर्ज़-ए-परेशानी-ए-बज़्म
बर्ग-ए-गुल रेज़ा-ए-मीना की निशानी माँगे
ज़ुल्फ़ तहरीर-ए-परेशान-ए-तक़ाज़ा है मगर
शाना-साँ मू-ब-ज़बाँ ख़ामा-ए-मानी माँगे
आमद-ए-ख़त से न कर ख़ंदा-ए-शीरीं कि मबाद
चश्म-ए-मोर आईना-ए-दिल निगरानी माँगे
हूँ गिरफ़्तार-ए-कमीं-गाह-ए-तग़ाफ़ुल कि जहाँ
ख़्वाब सय्याद से पर्वाज़-ए-गिरानी माँगे
चश्म पर्वाज़ ओ नफ़स ख़ुफ़्ता मगर ज़ोफ़-ए-उमीद
शहपर-ए-काह पए-मुज़्दा-रिसानी माँगे
वहशत-ए-शोर-ए-तमाशा है कि जूँ निकहत-ए-गुल
नमक-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर बाल-फ़िशानी माँगे
गर मिले हज़रत-ए-'बेदिल' का ख़त-ए-लौह-ए-मज़ार
'असद' आईना-ए-पर्वाज़-ए-मआनी माँगे
रंग ने गुल से दम-ए-अर्ज़-ए-परेशानी-ए-बज़्म
बर्ग-ए-गुल रेज़ा-ए-मीना की निशानी माँगे
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है