नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच
अगर शराब नहीं इंतिज़ार-ए-साग़र खींच
कमाल-ए-गर्मी-ए-सई-ए-तलाश-ए-दीद न पूछ
ब-रंग-ए-ख़ार मिरे आइने से जौहर खींच
तुझे बहाना-ए-राहत है इंतिज़ार ऐ
किया है किस ने इशारा कि नाज़-ए-बिस्तर खींच
तिरी तरफ़ है ब-हसरत नज़ारा-ए-नर्गिस
ब-कोरी-ए--ओ-चश्म-ए-रक़ीब साग़र खींच
ब-नीम-ग़म्ज़ा अदा कर हक़-ए-वदीअत-ए-नाज़
नियाम-ए-पर्दा-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर से ख़ंजर खींच
मिरे क़दह में है सहबा-ए-आतिश-ए-पिन्हाँ
ब-रू-ए-सुफ़रा कबाब-ए-दिल-ए-समंदर खींच
न कह कि ताक़त-ए-रुस्वाई-ए-विसाल नहीं
अगर यही अरक़-ए-फ़ित्ना है मुकर्रर खींच
जुनून-ए-आइना मुश्ताक़-ए-यक-तमाशा है
हमारे सफ़्हे पे बाल-ए-परी से मिस्तर खींच
ख़ुमार-ए-मिन्नत-ए-साक़ी अगर यही है 'असद'
दिल-ए-गुदाख़्ता के मय-कदे में साग़र खींच
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है