नाला जुज़ -ए-तलब ऐ सितम-ईजाद नहीं
है तक़ाज़ा-ए- शिकवा-ए-बेदाद नहीं
इश्क़-ओ-मज़दूरी-ए-इशरत-गह-ए-ख़ुसरव क्या ख़ूब
हम को तस्लीम निको-नामी-ए-फ़रहाद नहीं
कम नहीं वो भी ख़राबी में प वुसअत मालूम
दश्त में है मुझे वो ऐश कि घर याद नहीं
अहल-ए-बीनश को है तूफ़ान-ए-हवादिस मकतब
लुत्मा-ए-मौज कम-अज़ सैली-ए-उस्ताद नहीं
वाए महरूमी-ए-तस्लीम-ओ-बदा हाल-ए-वफ़ा
जानता है कि हमें ताक़त-ए-फ़रयाद नहीं
रंग-ए-तमकीन-ए-गुल-ओ-लाला परेशाँ क्यूँ है
गर चराग़ान-ए-सर-ए-रह-गुज़र-ए-बाद नहीं
सबद-ए-गुल के तले बंद करे है गुलचीं
मुज़्दा ऐ मुर्ग़ कि गुलज़ार में सय्याद नहीं
नफ़्य से करती है इसबात तराविश गोया
दी है जा-ए-दहन उस को दम-ए-ईजाद नहीं
कम नहीं जल्वागरी में तिरे कूचे से बहिश्त
यही नक़्शा है वले इस क़दर आबाद नहीं
करते किस मुँह से हो ग़ुर्बत की शिकायत 'ग़ालिब'
तुम को बे-मेहरी-ए-यारान-ए-वतन याद नहीं
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है