न होगा यक-बयाबाँ माँदगी से ज़ौक़ कम मेरा
हबाब-ए-मौजा-ए-रफ़्तार है नक़्श-ए-क़दम मेरा
मोहब्बत थी से लेकिन अब ये बे-दिमाग़ी है
कि मौज-ए-बू-ए- से नाक में आता है दम मेरा
रह-ए-ख़्वाबीदा थी गर्दन-कश-ए-यक-दर्स-ए-आगाही
ज़मीं को सैली-ए-उस्ताद है नक़्श-ए-क़दम मेरा
सुराग़-आवारा-ए-अर्ज़-ए-दो-आलम शोर-ए-महशर हूँ
पर-अफ़्शाँ है ग़ुबार आँ सू-ए-सहरा-ए-अदम मेरा
हवा-ए-सुब्ह यक-आलम गरेबाँ चाकी-ए-गुल है
दहान-ए-ज़ख़्म पैदा कर अगर खाता है ग़म मेरा
न हो वहशत-कश-ए-दर्स-ए-सराब-ए-सत्र-ए-आगाही
मैं गर्द-ए-राह हूँ बे-मुद्दआ है पेच-ओ-ख़म मेरा
'असद' वहशत-परस्त-ए-गोशा-ए-तन्हाई-ए-दिल है
ब-रंग-ए-मौज-ए-मय ख़म्याज़ा-ए-साग़र है रम मेरा
Responses
No comments yet. Be the first to respond.
कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है