मिरी हस्ती फ़ज़ा-ए-हैरत आबाद-ए-तमन्ना है
जिसे कहते हैं नाला वो उसी आलम का अन्क़ा है
ख़िज़ाँ क्या फ़स्ल-ए- कहते हैं किस को कोई मौसम हो
वही हम हैं क़फ़स है और मातम बाल-ओ-पर का है
वफ़ा-ए-दिलबराँ है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद-ए--हा-ए-हज़ीं का किस ने देखा है
न लाई शोख़ी-ए-अंदेशा ताब-ए-रंज-ए-नौमीदी
कफ़-ए-अफ़्सोस मिलना अहद-ए-तज्दीद-ए-तमन्ना है
न सोवे आबलों में गर सरिश्क-ए-दीदा-ए-नाम से
ब-जौलाँ-गाह-ए-नौमीदी निगाह-ए-आजिज़ाँ पा है
ब-सख़्ती-हा-ए-क़ैद-ए-ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद-ए-दाम-ए-रिश्ता-ए-रग-हा-ए-ख़ारा है
तग़फ़ुल-मशरबी से ना-तमामी बस-कि पैदा है
निगाह-ए-नाज़ चश्म-ए-यार में ज़ुन्नार-ए-मीना है
तसर्रुफ़ वहशियों में है तसव्वुर-हा-ए-मजनूँ का
सवाद-ए-चश्म-ए-आहू अक्स-ए-ख़ाल-ए-रू-ए-लैला है
मोहब्बत तर्ज़-ए-पैवंद-ए-निहाल-ए-दोस्ती जाने
दवीदन रेशा साँ मुफ़्त-ए-रग-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा है
किया यक-सर गुदाज़-ए-दिल नियाज़-ए-जोशिश-ए-हसरत
सुवैदा नुस्ख़ा-ए-तह-बंदी-ए-दाग़-ए-तमन्ना है
हुजूम-ए-रेज़िश-ए-ख़ूँ के सबब रंग उड़ नहीं सकता
हिना-ए-पंजा-ए-सैय्याद मुर्ग़-ए-रिश्ता बर-पा है
असर सोज़-ए-मोहब्बत का क़यामत बे-मुहाबा है
कि रग से संग में तुख़्म-ए-शरर का रेशा पैदा है
निहाँ है गौहर-ए-मक़्सूद जेब-ए-ख़ुद-शनासी में
कि याँ ग़व्वास है तिमसाल और आईना दरिया है
अज़ीज़ो ज़िक्र-ए-वस्ल-ए-ग़ैर से मुझ को न बहलाओ
कि याँ अफ़्सून-ए-ख़्वाब अफ़्साना-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा है
तसव्वुर बहर-ए-तस्कीन-ए-तपीदन-हा-ए-तिफ़्ल-ए-दिल
ब-बाग़-ए-रंग-हा-ए-रफ़्ता गुल-चीन-ए-तमाशा है
ब-सइ-ए-ग़ैर है क़त-ए-लिबास-ए-ख़ाना-वीरानी
कि नाज़-ए-जादा-ए-रह रिश्ता-ए-दामान-ए-सहरा है
Responses
No comments yet. Be the first to respond.
कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है