जिस जा नसीम शाना-कश-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार है
नाफ़ा दिमाग़-ए-आहु-ए-दश्त-ए-ततार है
किस का सुराग़ जल्वा है हैरत को ऐ
आईना फ़र्श-ए-शश-जहत-ए-इंतिज़ार है
है ज़र्रा ज़र्रा तंगी-ए-जा से -ए-शौक़
गर दाम ये है वुसअ'त-ए-सहरा शिकार है
दिल मुद्दई' ओ दीदा बना मुद्दा-अलैह
नज़्ज़ारे का मुक़द्दमा फिर रू-ब-कार है
छिड़के है शबनम आईना-ए-बर्ग-ए-गुल पर आब
ऐ अंदलीब वक़्त-ए-वदा-ए-बहार है
पच आ पड़ी है वादा-ए-दिल-दार की मुझे
वो आए या न आए पे याँ इंतिज़ार है
बे-पर्दा सू-ए-वादी-ए-मजनूँ गुज़र न कर
हर ज़र्रा के नक़ाब में दिल बे-क़रार है
ऐ अंदलीब यक कफ़-ए-ख़स बहर-ए-आशयाँ
तूफ़ान-ए-आमद आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार है
दिल मत गँवा ख़बर न सही सैर ही सही
ऐ बे-दिमाग़ आईना तिमसाल-दार है
ग़फ़लत कफ़ील-ए-उम्र ओ 'असद' ज़ामिन-ए-नशात
ऐ मर्ग-ए-ना-गहाँ तुझे क्या इंतिज़ार है
Responses
No comments yet. Be the first to respond.
कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है