जराहत-तोहफ़ा अल्मास-अर्मुग़ाँ दाग़-ए-जिगर हदिया
मुबारकबाद 'असद' -ख़्वार-ए-जान-ए-दर्दमंद आया
जुनूँ गर्म इंतिज़ार ओ नाला बेताबी कमंद आया
सुवैदा ता ब-लब ज़ंजीरी दूद सिपंद आया
मह अख़्तर फ़शाँ की बहर इस्तिक़बाल आँखों से
तमाशा किश्वर आईना में आईना बंद आया
तग़ाफ़ुल बद-गुमानी बल्कि मेरी सख़्त जानी से
बे हिजाब नाज़ को बीम गज़ंद आया
फ़ज़ा ख़ंदा गुल तंग ओ ज़ौक़ ऐश बे पर्दा
फ़राग़त गाह आग़ोश विदाअ' दिल पसंद आया
अदम है ख़ैर ख़्वाह जल्वा को ज़िंदान बेताबी
ख़िराम नाज़ बर्क़ ख़िरमन सई सिपंद आया
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है