तासीर से नौमेद नहीं
जाँ-सिपारी शजर-ए-बेद नहीं
सल्तनत दस्त-ब-दस्त आई है
जाम-ए-मय ख़ातम-ए-जमशेद नहीं
है तजल्ली तिरी सामान-ए-वजूद
ज़र्रा बे-परतव-ए-ख़ुर्शेद नहीं
राज़-ए-माशूक़ न रुस्वा हो जाए
वर्ना मर जाने में कुछ भेद नहीं
गर्दिश-ए-रंग-ए-तरब से डर है
-ए-महरूमी-ए-जावेद नहीं
कहते हैं जीते हैं उम्मेद पे लोग
हम को जीने की भी उम्मेद नहीं
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है