है सब्ज़ा-ज़ार हर दर-ओ-दीवार-ए--कदा
जिस की ये हो फिर उस की ख़िज़ाँ न पूछ
नाचार बेकसी की भी हसरत उठाइए
दुश्वारी-ए-रह-ओ-सितम-ए-हम-रहाँ न पूछ
जुज़ दिल सुराग़-ए-दर्द ब-दिल-ख़ुफ़्तगाँ न पूछ
आईना अर्ज़ कर ख़त-ओ-ख़ाल-ए-बयाँ न पूछ
हिन्दोस्तान साया-ए-गुल पा-ए-तख़्त था
जाह-ओ-जलाल-ए-अहद-ए-विसाल-ए-बुताँ न पूछ
ग़फ़लत-मता-ए-कफ़्फ़ा-ए-मीज़ान-ए-अद्ल हूँ
या रब हिसाब-ए-सख़्ती-ए-ख़्वाब-ए-गिराँ न पूछ
हर दाग़-ए-ताज़ा यक-दिल-ए-दाग़ इंतिज़ार है
अर्ज़-ए-फ़ज़ा-ए-सीना-ए-दर्द इम्तिहाँ न पूछ
कहता था कल वो महरम-ए-राज़ अपने से कि आह
दर्द-ए-जुदाइ-ए-'असद'-उल्लाह-ख़ाँ न पूछ
पर्वाज़-ए-यक-तप-ए-ग़म-ए-तसख़ीर-ए-नाला है
गरमी-ए-नब्ज़-ए-ख़ार-ओ-ख़स-ए-आशियाँ न पूछ
तू मश्क़-ए-बाज़ कर दिल-ए-परवाना है बहार
बेताबी-ए-तजल्ली-ए-आतिश-ब-जाँ न पूछ
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है