हासिल से हाथ धो बैठ ऐ आरज़ू-ख़िरामी
जोश-ए-गिर्या में है डूबी हुई असामी
उस शम्अ' की तरह से जिस को कोई बुझा दे
मैं भी जले-हुओं में हूँ दाग़-ए-ना-तमामी
करते हो शिकवा किस का तुम और बेवफ़ाई
सर पीटते हैं अपना हम और नेक-नामी
सद-रंग-ए- कतरना दर-पर्दा क़त्ल करना
तेग़-ए-अदा नहीं है पाबंद-ए-बे-नियामी
तर्फ़-ए-सुख़न नहीं है मुझ से ख़ुदा-न-कर्दा
है नामा-बर को उस से दावा-ए-हम-कलामी
ताक़त फ़साना-ए-बाद अंदेशा शोला-ईजाद
ऐ ग़म हुनूज़ आतिश ऐ दिल हुनूज़ ख़ामी
हर चंद उम्र गुज़री आज़ुर्दगी में लेकिन
है शरह-ए-शौक़ को भी जूँ शिकवा ना-तमामी
है यास में 'असद' को साक़ी से भी फ़राग़त
दरिया से ख़ुश्क गुज़रे मस्तों की तिश्ना-कामी
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है