गर्म-ए-फ़रियाद रखा शक्ल-ए-निहाली ने मुझे
तब अमाँ में दी बर्द-ए-लयाली ने मुझे
निस्यह-ओ-नक़्द-ए-दो-आलम की हक़ीक़त मालूम
ले लिया मुझ से मिरी हिम्मत-ए-आली ने मुझे
कसरत-आराइ-ए-वहदत है परस्तारी-ए-वहम
कर दिया काफ़िर इन असनाम-ए-ख़याली ने मुझे
हवस-ए- के तसव्वुर में भी खटका न रहा
अजब आराम दिया बे-पर-ओ-बाली ने मुझे
ज़िंदगी में भी रहा ज़ौक़-ए-फ़ना का मारा
नश्शा बख़्शा ग़ज़ब उस साग़र-ए-ख़ाली ने मुझे
बस-कि थी फ़स्ल-ए-ख़िज़ान-ए-चमानिस्तान-ए-सुख़न
रंग-ए-शोहरत न दिया ताज़ा-ख़याली ने मुझे
जल्वा-ए-ख़ुर से फ़ना होती है शबनम 'ग़ालिब'
खो दिया सतवत-ए-अस्मा-ए-जलाली ने मुझे
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है