गर ख़ामुशी से फ़ाएदा इख़्फ़ा-ए-हाल है
ख़ुश हूँ कि मेरी बात समझनी मुहाल है
किस को सुनाऊँ हसरत-ए-इज़हार का गिला
फ़र्द-ए-जमा-ओ-ख़र्च ज़बाँ-हा-ए-लाल है
किस पर्दे में है आइना-पर्दाज़ ऐ
रहमत कि उज़्र-ख़्वाह-ए-लब-ए-बे-सवाल है
है है ख़ुदा-न-ख़्वास्ता वो और दुश्मनी
ऐ शौक़-ए-मुन्फ़इल ये तुझे क्या ख़याल है
मुश्कीं लिबास-ए-काबा अली के क़दम से जान
नाफ़-ए-ज़मीन है न कि नाफ़-ए-ग़ज़ाल है
वहशत पे मेरी अरसा-ए-आफ़ाक़ तंग था
दरिया ज़मीन को अरक़-ए-इंफ़िआ'ल है
हस्ती के मत फ़रेब में आ जाइयो 'असद'
आलम तमाम हल्क़ा-ए-दाम-ए-ख़याल है
पहलू-तही न कर ग़म-ओ-अंदोह से 'असद'
दिल वक़्फ़-ए-दर्द कर कि फ़क़ीरों का माल है
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है