चश्म-ए-ख़ूबाँ ख़ामुशी में भी नवा-पर्दाज़ है
सुर्मा तो कहवे कि दूद-ए-शो'ला-ए-आवाज़ है
पैकर-ए-उश्शाक़ साज़-ए-ताला-ए-ना-साज़ है
नाला गोया गर्दिश-ए-सैय्यारा की आवाज़ है
दस्त-गाह-ए-दीदा-ए-खूँ-बार-ए-मजनूँ देखना
यक-बयाबाँ जल्वा-ए- फ़र्श-ए-पा-अंदाज़ है
चश्म-ए-ख़ूबाँ मै-फ़रोश-ए-नश्शा-ज़ार-ए-नाज़ है
सुर्मा गोया मौज-ए-दूद-ए-शोला-ए-आवाज़ है
है सरीर-ए-ख़ामा रेज़िश-हा-ए-इस्तिक़्बाल-ए-नाज़
नामा ख़ुद पैग़ाम को बाल-ओ-पर-ए-परवाज़ है
सर-नाविश्त-ए-इज़्तिराब-अंजामी-ए-उल्फ़त न पूछ
नाल-ए-ख़ामा ख़ार-ख़ार-ए-ख़ातिर-ए-आगाज़ है
शोख़ी-ए-इज़्हार ग़ैर-अज़-वहशत-ए-मजनूँ नहीं
लैला-ए-मानी 'असद' महमिल-नशीन-ए-राज़ है
नग़्मा है कानों में उस के नाला-ए-मुर्ग़-ए-असीर
रिश्ता-ए-पा याँ नवा-सामान-ए-बंद-ए-साज़ है
शर्म है तर्ज़-ए-तलाश-ए-इंतिख़ाब-ए-यक-
इज़्तिराब-ए-चश्म बरपा दोख़्ता-ग़म्माज़ है
Responses
No comments yet. Be the first to respond.
कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है