चाहिए अच्छों को जितना चाहिए
ये अगर चाहें तो फिर क्या चाहिए
सोहबत-ए-रिंदाँ से वाजिब है हज़र
जा-ए-मय अपने को खींचा चाहिए
चाहने को तेरे क्या समझा था
बारे अब इस से भी समझा चाहिए
चाक मत कर जैब बे-अय्याम-ए-
कुछ उधर का भी इशारा चाहिए
दोस्ती का पर्दा है बेगानगी
मुँह छुपाना हम से छोड़ा चाहिए
दुश्मनी ने मेरी खोया ग़ैर को
किस क़दर दुश्मन है देखा चाहिए
अपनी रुस्वाई में क्या चलती है सई
यार ही हंगामा-आरा चाहिए
मुनहसिर मरने पे हो जिस की उमीद
ना-उमीदी उस की देखा चाहिए
ग़ाफ़िल इन मह-तलअ'तों के वास्ते
चाहने वाला भी अच्छा चाहिए
चाहते हैं ख़ूब-रूयों को 'असद'
आप की सूरत तो देखा चाहिए
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है