अर्ज़-ए-नाज़-ए-शोख़ी-ए-दंदाँ बराए-ख़ंदा है
दावा-ए-जमियत-ए-अहबाब जा-ए-ख़ंदा है
है अदम में ग़ुंचा महव-ए-इबरत-ए-अंजाम-ए-
यक-जहाँ ज़ानू तअम्मुल दर-क़फ़ा-ए-ख़ंदा है
कुल्फ़त-ए-अफ़्सुर्दगी को ऐश-ए-बेताबी हराम
वर्ना दंदाँ दर अफ़्शुर्दन बिना-ए-ख़ंदा है
शोरिश-ए-बातिन के हैं अहबाब मुंकिर वर्ना याँ
दिल मुहीत-ए-गिर्या ओ लब आशना-ए-ख़ंदा है
ख़ुद-फ़रोशी-हा-ए-हस्ती बस-कि जा-ए-ख़ंदा है
हर शिकस्त-ए-क़ीमत-ए-दिल में सदा-ए-ख़ंदा है
नक़्श-ए-इबरत दर नज़र या नक़्द-ए-इशरत दर बिसात
दो-जहाँ वुसअत ब-क़द्र-ए-यक-फ़ज़ा-ए-ख़ंदा है
जा-ए-इस्तिहज़ा है इशरत-कोशी-ए-हस्ती 'असद'
सुब्ह ओ शबनम फ़ुर्सत-ए-नश्व-ओ-नुमा-ए-ख़ंदा है
Responses
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कशाकश हा हस्ती से करे क्या सई आज़ादी
हुई ज़ंजीर मौज आब को फ़ुर्सत रवानी की
नश्शा हा शादाब रंग व साज़ हा मस्त तरब
शीशा-ए मय सर्व सब्ज़ जोयबार नग़्मा है
वफ़ा दलबरां है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद दिल हा हज़ीं का किस ने देखा है
ब सख़्ती हा क़ैद ज़िंदगी मालूम आज़ादी
शरर भी सैद दाम रिश्ता-ए रग हा ख़ारा है
तसव्वुर बहर तस्कीन तपीदन हा तिफ़्ल दिल
ब बाग़ रंग हा रफ़्ता गुल चैन तमाशा है
बजा है गर न सुने नाला हाये बुलबुल ज़ार
कि गोश गुल नम शबनम से पनबा आगीं है